Samarpan

Samarpan – 3

शीतल रोज सवेरे जागती और नित्य क्रिया के बाद नहाकर फिर पूजा करती थी और फिर चाय बनाकर विकास को जगाती थी और फिर नाश्ता बनाने में लग जाती थी।

शीतल रोज सवेरे जागती और नित्य क्रिया के बाद नहाकर फिर पूजा करती थी और फिर चाय बनाकर विकास को जगाती थी और फिर नाश्ता बनाने में लग जाती थी। विकास के जाने से पहले वो नाश्ता और लंच बना लेती थी और विकास को दे देती थी। उसके बाद उसके पास कुछ विशेष काम रह नहीं जाता था। शीतल अपने कपड़े छत पर सूखने देती थी। आधा छत जो खाली था, उसपे कपड़े टाँगने के लिए रस्सी बंधी हुई थी और शीतल वहीँ पे अपने कपड़े सूखने के लिए फैलाती थी। वो विकास के जाने के बाद अपने कपड़े छत पे फैला देती थी और शाम में उन्हें नीचे अपने पास ले आती थी। आज जब शीतल अपने कपड़े लेकर अपने रूम में आयी और उसे समेट कर उसकी जगह पर रखने लगी तो उसकी नज़र अपने पैंटी पर गयी। शीतल के पैंटी ब्रा भी महंगे और डिज़ाइनर थे। उसे अपनी पैंटी थोड़ी टाइट लगी। शीतल पैंटी को उलट पुलट कर देखने लगी, लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आया। उसे लगा की हो सकता है कि सुबह में ठीक से साफ़ नहीं हुआ होगा। अगले दिन भी यही हुआ। आज भी जब शीतल अपनी पैंटी को मोड़ कर रखने लगी तो उसे अपना पैंटी काफी कड़ा जैसा लग रहा था। शीतल आज सुबह पैंटी को अच्छे से साफ की थी और ये उसे याद था। वो पैंटी को गौर से देखने लगी और सामने वाला हिस्सा अंदर से जो उसकी चुत के सामने होता, वहाँ कुछ दाग जैसा था, और वही कड़ा था। उसे समझ नहीं आया की ये क्या है। वो जो पैंटी अभी पहनी हुई थी, उसे देखि तो उसकी पैंटी सुखी हुई थी और ऐसा कुछ भी नहीं लगा हुआ था वहाँ। रात में वो विकास के साथ सेक्स भी नहीं की थी। वो …

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