Samarpan

Samarpan – 11

शीतल नाईट सूट वाले टॉप और ट्रोउजर में थी।

शीतल नाईट सूट वाले टॉप और ट्रोउजर में थी। वो किचन में चली गयी और वसंत के लिए पानी रख कर चली गयी और उसके लिए भी खाना बनाने लगी। वसंत अभी भी शीतल को देख नहीं रहा था। वसंत विकास से बातें कर रहा था और शीतल बीच बीच में बाहर हॉल में उनलोगों के पास कभी चाय देने तो कभी कप उठाने जा रही थी, लेकिन वसंत की नज़र उसके ऊपर उठ ही नहीं रही थी। शीतल अभी भी वही पैंटी पहनी हुई थी जिसपे दोपहर में वसंत ने वीर्य गिराया था। वसंत को सामने देखकर उसकी चुत और गीली हो गयी की यही आदमी उसके सामने बैठा है जिसका वीर्य उसकी चुत पर लगा है। उसे लगा की वसंत ने उसे चोद कर उसकी चुत में ये वीर्य भरा है और वही उसकी पैंटी में लगा हुआ है। शीतल अपना दोपहर में लिया हुआ प्रण याद कर ली। शीतल अपने मन में क्या क्या सोच रही थी और वसंत था कि उसकी तरफ देख भी नहीं रहा था। शीतल अपने टॉप का ऊपर का एक बटन खोल दी और बाहर आकर पूछने लगी की “खाना लगा दूँ क्या?” अब शीतल की क्लीवेज की झलक दिख रही थी। विकास “हाँ” बोला तो शीतल खाना परोसने लगी। वो सोफे के पास लगे सेंटर टेबल पर ही थाली ले आयी। शीतल वसंत के सामने खड़ी होकर खाना टेबल पे रख रही थी और जब वो झुकी तो वसंत की नज़रों के सामने दो पके गुदाज रसभरे आम लटक गए थे। वसंत की नज़र उन आमों पे पड़ ही गयी और एक झटके में उसका …

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