Samarpan

Samarpan – 8

वसंत रूम में घुसते ही नंगा हो गया और अपने टाइट निजी पल को सहलाने लगा।

वसंत रूम में घुसते ही नंगा हो गया और अपने टाइट लण्ड को सहलाने लगा। नीचे शीतल जैसी गर्म माल उसके लिए तैयार होकर बैठी थी लेकिन वो उसे ठीक से देख भी नहीं पाया। उसे खुद पे गुस्सा भी आ रहा था और उसे शीतल की हरकतें भी याद आ रही थी। वो शीतल के कातिल बदन को याद करता हुआ लण्ड सहलाने लगा और फिर वीर्य निकलने के बाद ही वो सो पाया। वो शीतल को पाना चाहता था, उसके नंगे बदन से खेलना चाहता था, उसकी गोल और नर्म मुलायम चुचियों को जोर जोर से मसलना चाहता था, उसकी चुत में अपना वीर्य भरना चाहता था। लेकिन उसे डर लगता था अपनी बदनामी से, समाज से। शीतल उससे आधे उम्र की थी और शादी शुदा औरत थी, किसी और का हक़ था उसपे। अपने मन में वो शीतल के बारे में बहुत कुछ सोचता रहा। अगर वो सही समझ रहा था तो वो शीतल को पा सकता था और जहाँ तक रिस्क नहीं था वहाँ तक तो चेक किया ही जा सकता था। अगले दिन दोपहर होते ही शीतल वसंत के लण्ड का दर्शन करने के लिए अपनी जगह पर पहुँच …

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