Samarpan

Samarpan – 12

शीतल वसंत के ख्यालों में खोयी थी की विकास उसकी तरफ करवट बदला और उसके पेट पे हाथ रखकर सहलाता हुआ अपना हाथ ऊपर उसकी चुच्ची पर ले आया और हल्के…

शीतल वसंत के ख्यालों में खोयी थी की विकास उसकी तरफ करवट बदला और उसके पेट पे हाथ रखकर सहलाता हुआ अपना हाथ ऊपर उसकी चुच्ची पर ले आया और हल्के हाथों से दबाता हुआ बोला “ब्रा क्यों खोल दी हो?” शीतल थोड़ा घबरा गयी लेकिन तुरंत बात को सम्हालती हुई बोली “बहुत गर्मी लग रही थी और पेट भी टाइट लग रहा था, तो खोल दी। तब थोड़ा रिलैक्स हुई। विकास शीतल की टॉप को ऊपर कर दिया और चुचियों को बाहर निकाल कर सहलाने लगा। शीतल विकास का हाथ रोकती हुई टॉप को नीचे करके चुचियों को ढक ली और मना करती हुई बोली की “आज तबियत ठीक नहीं लग रही।” विकास करवट बदल कर सोने लगा। शीतल अभी अभी वसंत से चुच्ची को मसलवाई थी और वो नहीं चाहती थी की वसंत के घर में रहते विकास उसके बदन में आग लगाए और फिर उसके तन बदन को जलता हुआ छोड़कर सो जाए। हाँ… अगर वसंत उसकी चुचियों को मसलना चाहे तो फिर कोई परेशानी नहीं थी उसे। वसंत को भी नींद नहीं आ रही थी। मज़ा आ गया था उसे। बहुत सालों बाद उसने किसी औरत को पटाने के बारे में सोचा था और वो औरत उम्र में उससे आधी से भी कम थी, दूसरे मजहब की थी और बेहद हसीन थी, लेकिन फिर भी वसंत कामयाब हो गया था। आज तक उसने बस शीतल …

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