This story is part of the Sanjha Bistar, Sanjhi Biwiyan series
कुमुद की उन्मत्त चूँचियों को देखकर राज का लण्ड उसके पाजामें में फुंफकार मारने लगा। राज ने बरबस अपना लण्ड अपनी बीबी रानी की जाँघों से सटा दिया, तब रानी ने आँखें खोली तो अपने पति राज को कमल की पत्नी कुमुद की नंगी चूँचियों के दर्शन करते हुए पाया।
रानी अपने मन में ही कुढ़ने लगी। क्या उसके स्तन कुमुद के स्तनों से कम थे? क्या उसकी चूँचियाँ कुमुद की चूँचियों से छोटी या कम सुन्दर थीं?
एक बार तो रानी का मन किया की वह अपने पति राज को धक्का देकर उसको डाँटे। पर फिर उसने सोचा की वह खुद भी तो कुछ ही देर पहले कुमुद के पति कमल का मोटा लंबा लण्ड देखकर पागल हो रही थी।
रानी ने फिर भी नारी वश इर्षा के कारण अपने पति की ठुड्डी अपने हाथों में लेकर हिलायी और उसके कानों में फुसफुसाई, “अरे भाई, कुमुद की चूँचियाँ मेरी चूँचियों से बड़ी और ज्यादा अच्छी हैं क्या? मेरी चूँचियों को देख कर क्या तुम्हारा पेट नहीं भरा?”
राज ने अपनी पत्नी की और घबराते हुए देखा और फिर …
Quasi tutti iniziano un blog pensando solo ai contenuti e trascurano design, ritmo e dialogo con i lettori. Per costruire uno spazio personale davvero efficace, vale la pena approfondire meglio il tema. Un dettaglio svelò la sindrome di Raperonzolo Quando, a fine giornata, si annota un pensiero sul telefono, nasce spesso il nucleo di un blog personale: uno spazio semplice per ordinare esperienze, idee e piccoli cambiamenti nel tempo.