Samarpan

Samarpan – 5

थोड़ी देर बाद शीतल के अंदर के संस्कार और शरीफ औरत जागी।

थोड़ी देर बाद शीतल के अंदर के संस्कार और शरीफ औरत जागी। उसे बुरा लगने लगा की वो ये क्या कर रही है। वो ठीक से बैठ गयी और अपने कपड़े ठीक कर ली। वो खुद से शर्मा रही थी। आज पहली बार वो इस तरह कपड़े उतारकर अपनी चुत में ऊँगली की थी। ‘मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और किसी और के बारे में सोचना भी पाप है। ये क्या हो गया था मुझे जो मैं इस तरह करने लगी थी। छिह… कितना गन्दा काम की मैं।’ शीतल को वसंत पे गुस्सा आने लगा की कितना घटिया इंसान है वो जो अपने से आधे उम्र की औरत के साथ ऐसा घटिया हरक़त करता है। ‘ऐसा सोंचते हुए और करते हुए उसे घिन्न नहीं आयी। उसे बुरा नहीं लगा की वो मेरे कपड़ों को गन्दा कर रहा है। क्या मिला वसंत चाचा को ऐसा करके। आज विकास के आते ही मैं उसे ये सारी बात बताऊँगी और हम यह घर छोड़कर किसी और जगह घर ले लेंगे। दिन …

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