ससुर बहू सेक्स की कहानी में पढ़ें कि मैं काफी समय बाद अपने गाँव गया तो वहां का देसी सौन्दर्य देख मेरा लंड चूत मांगने लगा. घर में चाचा की पुत्रवधू को देखा तो …
अन्तर्वासना के सभी पाठको को मेरा नमस्कार। मैं आनंद मेहता 50 साल का हूं. मेरी कलम से आपके लिए प्रस्तुत है एक कामुक रचना. मेरी इस ससुर बहू सेक्स की कहानी का भरपूर आनंद लीजिये.
मैं रेलगाड़ी की यात्रा करके अपने गांव आखिरकार पहुंच गया। मेरे शहर का घर और गांव की दूरी बहुत अधिक नहीं है. रेलगाड़ी से एक घंटे की यात्रा. फिर बस से एक घंटा और अंत में कुछ मिनटों की पैदल यात्रा.
अपने गांव के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए मैं पैदल ही आखिरी यात्रा तय करता था. किसी को भी अपने गांव से मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाने के लिए बुलाता नहीं था. गांव में कइयों के घर मोटरसाइकिल दहेज में आ चुकी था। आजकल के लौंडों को तो दहेज में बाइक चाहिए ही चाहिए, चाहे बीवी मिले या न मिले।
जब बस से उतरकर अपने गांव में प्रवेश किया तो जो नजारा मेरी आंखों के सामने चल रहा था, वह बड़ा ही मनमोहक और आनंदित करने वाला था। खेतों में खड़ी गेहूं की पकी बालियां झुंड में झूमने लगतीं जब हवा का एक तेज झोंका फसलों से होकर गुजरता था.
वहीं सड़क के दूसरे छोर पर एक नदी बहती थी। जब नदी के कल-कल करते जल की धाराओं को देखा तो मन का कोना-कोना खुशी से भर गया. फिर मेरी नजर धारा के साथ बहते-बहते एक स्त्रियों के समूह पर जा टिकी.
ये नजारा मेरे दिल की धड़कनों को बढ़ाने लगा और साथ ही साथ मेरे लन्ड के आकार को भी। कुछ औरतें अपने बड़े-बड़े स्तनों को रगड़-रगड़ कर साफ़ करते हुए एक दूसरे से हंसते-खिलखिलाते हुए बातचीत कर रहीं थीं।
उस झुंड में तीन-चार मोटी औरतें भी थीं. उनके …