Samarpan
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Samarpan – 18
'अब तो चाहे कुछ भी हो जाये, मैं आपको नहीं छोड़ सकती। मैं किसी और की पत्नी हूँ, इसलिए आपको…
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Samarpan – 19
शीतल को मज़ा तो नहीं ही आया था, उल्टा वो कुछ तनाव में थी। उसके दिमाग में बस वसंत चल…
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Samarpan – 3
शीतल रोज सवेरे जागती और नित्य क्रिया के बाद नहाकर फिर पूजा करती थी और फिर चाय बनाकर विकास को…
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Samarpan – 4
शीतल के दिमाग में पिछले 6 महीने के सारे दृश्य आँखों के सामने से गुजर रहा था और उसे एक…
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Samarpan – 5
थोड़ी देर बाद शीतल के अंदर के संस्कार और शरीफ औरत जागी। उसे बुरा लगने लगा की वो ये क्या…
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Samarpan – 6
शाम में जब विकास घर आया, तब तक शीतल वसंत के बारे में काफी कुछ सोच चुकी थी और उसे…
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Samarpan – 7
दिन में शीतल फिर से दोपहर का वेट कर रही थी। अब उसके मन में कोई द्वन्द नहीं चल रहा…
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Samarpan – 8
नीचे शीतल जैसी गर्म माल उसके लिए तैयार होकर बैठी थी लेकिन वो उसे ठीक से देख भी नहीं पाया।…
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Samarpan – 9
आज रात में भी शीतल विकास से वसंत के बारे में ही बात कर रही थी। बोली "वसंत चाचा आज…
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Samarpan – 10
शीतल सोचती सोचती नींद के आगोश में जा चुकी थी। शीतल रोज सवेरे जागती थी और फ्रेश होकर नहा कर…
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