नए घर में मेरी पहली होली थी. मुझे अब वैसे भी होली खेलना इतना पसंद नहीं था जितना बचपन में था. हमारे मौहल्ले में ही होली का दहन हुआ और हमने उसमे हिस्सा लिया. ये होली सेक्स स्टोरी उसी दिन के बाद शुरू हुई!
अगले दिन रंगो की होली थी. मुझमे तो इतना उत्साह नहीं था पर पति हर बार की तरह उत्साही थे. उन्होंने हमारे बच्चे को भी इस उत्साह में शामिल कर लिया था.
उनका प्लान था कि यहाँ होली खेलने के बाद वो लोग अपने पुश्तैनी घर भी जायेंगे जहा मेरी सास रहती हैं. वहाँ भी पुराने पडोसी और रिश्तेदार हैं जिनके साथ हर साल होली खेलते आये हैं..
मैंने उनको पहले ही मना कर दिया कि मेरा दो दो जगह होली खेलने का कोई प्लान नहीं हैं. इस मोहल्ले में हम वैसे भी नए थे तो ज्यादा कोई रंगो से भरेगा नहीं पर पुराने घर गए तो जान पहचान की वजह से कुछ ज्यादा ही रंग भर देंगे.
होली का दिन भी आया और सुबह एक घंटे के अंदर ही हमने मोहल्ले की छोटी सी होली खेल ली. पति का पेट तो इस छोटी सी होली खेलने से जैसे भरा ही नहीं. उनका प्लान वो वैसे ही पुराने घर जा होली खेलने का था.
मैं वापिस घर पर आ कर नहा ली. पति बच्चे को लेकर पुराने घर होली खेलने निकल गए.
मैंने अपनी वो नयी साड़ी पहन ली जो होली पर पति ने उपहार में दी थी. वैसे भी अब कोई रंग तो लगाने वाला ही नहीं था और कोई दिक्कत नहीं थी.
मैंने मोतीया रंग की काम वाली साडी और उस पर सफ़ेद रंग का ब्लाउज पहन लिया और अच्छे से मेकअप कर देखने लगी, आने वाले सामाजिक कार्यक्रम में ये साड़ी कैसी लगेगी. थोड़ी देर के लिए ही पहननी थी तो मैंने ब्रा भी नहीं पहना.
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