Samarpan

Samarpan – 20

विकास और वसंत के जाने के बाद शीतल घर के कामो में व्यस्त थी।

विकास और वसंत के जाने के बाद शीतल घर के कामो में व्यस्त थी। लगभग 11 बजे उसके पास विकास का फोन का आया की उसके ऑफिस का पियोन मक़सूद घर पहुँचने वाला होगा तो उससे डाइनिंग हॉल में पंखा लगवा लेना। शीतल को मक़सूद बिल्कुल पसंद नहीं था। बहुत सारे लोग शीतल को घूरते थे, आँखों से उसके बदन के उतार चढ़ाव का नाप लेते थे, लेकिन मक़सूद अजीब था। उसकी आँखों को शीतल अपने बदन पर चुभती हुई महसूस करती थी। ऐसा लगता था जैसे उसकी आंखें कपड़ों को भेदकर शीतल के नंगे बदन को देख रही थी। शीतल उसके सामने असहज महसूस करती थी। हालाँकि आँखों से नापने के अलावा उसकी और कभी किसी तरह की कोई बदतमीज़ी करने की हिम्मत नहीं हुई। यहाँ तक की अगर शीतल उसे देख लेती थी तो वो नज़रें झुका लेता था, लेकिन फिर से उसी तरह देखने लगता था। शीतल को वो दिन याद आ गया जिस दिन वो पहली बार यहाँ आई थी और घर का सामान यहाँ उतर रहा था. मक़सूद भी उसके घर का सारा सामान एडजस्ट करने …

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