Samarpan

Samarpan – 17

निजी रिश्ते का सारा रस पी जाने के बाद वसंत शीतल को देखने लगा।

चुत का सारा रस पी जाने के बाद वसंत शीतल को देखने लगा। शीतल की ऑंखें बंद थी। वो आँख खोलकर वसंत को खुद को देखता हुई देखी तो शर्मा गयी और मुस्कुराती हुई नज़र दूसरी तरफ कर ली। अब वसंत अभी रुक नहीं सकता था। अभी शीतल संतुष्ट थी और अभी वसंत अपनी चाल नहीं चल सकता था। उसे अब इस खेल को थोड़ा आगे और बढ़ाना ही पड़ता। उसे अफ़सोस हो रहा था कि उसने एक मिनट पहले क्यों नहीं खुद को रोक लिया जब शीतल पूरी गर्म थी। उसने कुछ सेकंड का लालच किया था और उसके छोड़ने से पहले शीतल की चुत ढेर सारा रस छोड़ दी थी। शीतल उठ कर बैठ गयी और शरमाते हुए वसंत को बोली “ऐसे क्या देख रहे हैं” और हाथ लगाकर उसे सामने से हटाई। वसंत ने उसे पकड़ लिया और उसे लिए हुए बिस्तर पर गिर गया। अब शीतल की बारी थी। वो वसंत के ऊपर लेटी हुई थी और वसंत के बदन को सहलाने चूमने लगी थी। उसे इस खेल में मज़ा आ रहा था। शीतल का हाथ वसंत के लण्ड के पास पहुँचा तो उसे फिर से हिचकिचाहट हुई, लेकिन वो तुरन्त ही लण्ड को हाथ में पकड़ ली। लण्ड अभी पूरा टाइट नहीं था तो ढीला भी नहीं था। वो लण्ड को सहलाने लगी और अपनी चुच्ची को वसंत के बदन में रगड़ रही थी। वसंत के लण्ड में हरकत होने लगी थी। शीतल भी लण्ड पकड़े हुए वसंत के दोनों पैरों के बीच में आ गयी। अब वसंत का लण्ड उसके हाथ में था और नज़रों के सामने था। शीतल अच्छे से वसंत के लण्ड को देख रही थी। ‘कितना काला, लम्बा और मोटा है ये। विकास का लण्ड तो इसके सामने बच्चा है।’ शीतल हाथ को ऊपर नीचे करके लण्ड सहला रही थी और हर स्ट्रोक के साथ लण्ड टाइट होता जा रहा था। वसंत के लण्ड का सुपाड़ा और फ़ैल गया था और चमक रहा …

💬 కొత్త కథలు ,ఎపిసోడ్ అప్డేట్స్ కోసం ఏదైనా డౌట్స్ ఉంటె టెలిగ్రామ్ లో జాయిన్ అవ్వండి
📲 ఇప్పుడే మా Telegram ఛానల్‌లో చేరండి!

📢 కొత్త కథలు వెంటనే Telegramలో!
👉 మా Telegram ఛానల్‌లో చేరండి 👈

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
📲 మా Telegram ఛానల్‌లో చేరండి
Join Telegram Join our Telegram Channel

Adblock Detected

please remove ad blocker