Samarpan

Samarpan – 16

वसंत शीतल के मुँह में अपना जीभ घुमा रहा था और शीतल के जीभ को चूस रहा था.

वसंत शीतल के मुँह में अपना जीभ घुमा रहा था और शीतल के जीभ को चूस रहा था. शीतल की पीठ, गांड को सहला रहा था, मसल रहा था. शीतल का बदन पिघलता जा रहा था. वसंत उसके बदन से खेल रहा था. और जिस तरह वो उसके बदन को मसल रहा था, जैसे होठ और जीभ चूस रहा था, शीतल का बदन अपने होश खो रहा था। वो अपनी जीत महसूस कर रही थी. जो वो चाहती थी, वो हो रहा था. वो भी वसंत का उत्साह बढ़ाने के लिए उसके बदन को सहला रही थी. अब तो शीतल ही खुद को नहीं रोक पाने की स्थिति में थी. वसंत शीतल के जिस्म को अपने जिस्म से रगड़ रहा था. उसने शीतल के होठों को छोड़ा और उसके गर्दन पर चूमता हुआ बोला “हाँ शीतल, मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ, तुम्हे छूना चाहता हूँ, चूमना चाहता हूँ, मसलना चाहता हूँ, खेलना चाहता हूँ तुम्हारे बदन से.” वसंत का हाथ शीतल की गांड को सहला रहा था अपने कमर को शीतल की कमर से पूरी तरह सटा कर रगड़ रहा था. इस तरह अपने बदन को शीतल के बदन से रगड़ने से उसका लुंगी खुल गया और नीचे गिर गया. वसंत अब नीचे से नंगा था और …

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