Samarpan

Samarpan – 15

वसंत घर आया तो आज भी शीतल के घर का दरवाज़ा अन्दर से बंद था, लेकिन आज वसंत को बुरा नहीं लगा था, क्यों की उसे 100 फीसदी यकीन था की आज शीतल ऊपर…

वसंत घर आया तो आज भी शीतल के घर का दरवाज़ा अन्दर से बंद था, लेकिन आज वसंत को बुरा नहीं लगा था, क्यों की उसे 100 फीसदी यकीन था की आज शीतल ऊपर जरूर आएगी. वसंत भी आज दिन भर में काफी कुछ सोच चूका था की उसे अब अपने पासे कैसे फेकने हैं. उसे शीतल सिर्फ एक बार या कुछ समय के लिए नहीं चाहिए थी, जिंदगी भर के लिए चाहिए थी, तन और मन दोनों से चाहिए थी. वो अपने कमरे में चला गया और थोड़ी देर बाद कपड़े बदलकर लुंगी गंजी में बाहर आ गया. शीतल के दिल की धड़कन फिर से काफी तेज़ थी. उसे सामने जाकर वसंत से वो सब बात करना था, जो वो विकास से भी नहीं करती थी. लेकिन उसे ऐसा करना ही था, और आज ही करना था. समय का अंदाज़ा लगाकर वो धीरे से अपने घर से बाहर निकली और छत पर आ गयी. वसंत भी शीतल की पैंटी को हाथ में लिया ही था की शीतल वहाँ पहुँच गयी. “ये क्या कर रहे आप वसंत चाचा?” वसंत ने ऐसी एक्टिंग की जैसे वो हडबडा गया हो. “कुछ… कुछ नहीं…. ये बस नीचे गिर गया था तो इसे उठा रहा था.” शीतल को अपनी गलती का एहसास हो गया की वो वसंत को शर्मिंदगी का एहसास करा दी. उसे इस तरह नहीं बोलना चाहिए …

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