देव के वापस आने के बाद देव और मंजू की शरारत भरी मस्ती बढ़ती ही जा रही थी। करीब हर रोज, माँ की नजर चुका कर देव मंजू को जकड ने कोशिश में लगा रहता था और मंजू उसे अंगूठा दिखाकर एक शरारत भरी नजर से देख हंस कर खिसक जाती थी। एक दिन सुबह मैं कमरे में पढ़ाई कर रहा था तब मंजू आयी। थोड़ी देर तक तो हम दोनों बात करते रहे पर फिर मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने पूछ ही लिया की उसके और देव के बिच में क्या चल रहा था। रियल इन्सेस्ट सेक्स स्टोरीज हिंदी चुदाई कहानी
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मंजू ने मुझे कहा,”छोटे भैया, उसके लण्ड में जवानी की खुजली हो रही है। वह अपनी हवस की भूख मुझसे बुझाना चाहता है। ”
तब मैंने मंजू की और देखा और पूछा, “और तुम? तुम क्या चाहती हो?”
मंजू ने सीधा जवाब दिया, “छोटे भैया, सच कहूं? मेरा भी वही हाल है। मुझे भी खुजली हो रही है। पर मैं आसानी से उसके चुंगल में फंसने वाली नहीं हूँ। मैं देखना चाहती हूँ की उसमें कितना दम है।” यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
मैं मंजू की बात सुन हैरान रह गया। बापरे! एक सीधी सादी गॉंव की लड़की और इतनी चालाक?
मेरी उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी। मैं देखना चाहता था की उन दोनों की जवानी क्या रंग लाती है।
ऐसे ही दिन बितते चले गए। देव को मंजू को फाँसने का मौक़ा नहीं मिल रहा था। माँ के रहने से मंजू को खिसक ने का मौक़ा मिल जाता था, और देव हाथ पे हाथ धरे वापस चला जाता था।
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