This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series
राहुल ने ऑफिस के केबिन में ही मेरे मजे लूट लिए थे और हम पकडे जाने से बाल बाल बच गए थे। इस चक्कर में मेरी पैंटी उसके केबिन में रह गयी जो मुझे चाहिए थी, मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।
मैं: “मेरे कपड़े यहाँ रह गए थे”
राहुल: “कौन से कपड़े?”
मुझे पता था वो जानबूझ कर अनजान बन मेरे मुँह से सुनना चाहता था। मैं वापिस जाने लगी तो उसने आवाज लगा कर रोका। मैंने मुड़ कर देखा वो अपने हाथ में मेरी पैंटी पकड़ हिला रहा था।
राहुल: “ये चाहिए तुम्हे?”
मैंने आगे आकर अपना हाथ बढ़ाया, पर उसने अपना हाथ पीछे खिंच लिया।
राहुल: “इसे मैं तुम्हे पहनाउंगा ”
मै: “नहीं चाहिए, तुम्ही पहन लो”
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