अभी तक इस हिंदी सेक्स कहानी के पिछले भागखेल वही भूमिका नयी-11
में आपने पढ़ा कि इस कहानी के अंतिम किरदार के रूप में मैं निर्मला और राजशेखर के साथ सम्भोग में संलग्न थी.अब आगे:
फिर उसने मेरा हाथ पकड़ अपनी ओर खींच लिया. उसने मुझे सवारी करने का इशारा किया. उसके कहने के अनुसार मैं उसके ऊपर आ गई और लिंग अपनी योनि में प्रवेश करा के अपने चूतड़ आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी. मैं मस्ती से संभोग को आगे बढ़ाने लगी. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था, मगर मुझसे कहीं ज्यादा आनन्द राजशेखर ले रहा था. क्योंकि मेहनत तो मुझे करनी पड़ रही थी, वो तो केवल मजे ले रहा था.
जैसे जैसे मैं जोर लगाती जा रही थी, वैसे वैसे मेरे पसीने छूटने लगे थे और मेरी योनि में झनझनाहट होने लगी थी. मैं पूरी ताकत लगा कर अपने चूतड़ों को आगे पीछे करते हुए अपनी योनि में उसके लिंग का घर्षण करती रही.
अंततः मेरे पूरे बदन में सैंकड़ों चींटियों के रेंगने की अहसास होने लगा और मैं खुद को न रोक पाई. मैं जोरों से चीखती हुई झड़ने लगी.
मैं- हाय शेखर जी आहहह … ओह्ह … ईईई … मैं झड़ गई.
मैं राजशेखर के कंधों पर अपना सिर रख ढीली पड़ गई, जिसके वजह से वो उत्सुक होने लगा. उसने मुझे किसी तरह अपने ऊपर से उतारा और निर्मला को पकड़ कर उसे बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया. उसकी टांगें जमीन पर कर दीं. अब उसने खूंखार रूप ले लिया था. वो निर्मला के पीछे जाकर अपना लिंग उसकी …