This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
अच्छी अच्छी मानिनीयाँ भी चुदवाने को बेताब हुई?पहले तो पति से ही चुदती थी, गैरों पर क्यों मोहताज हुई?
दवा जो वफ़ा का करते थे जो ढोल वफ़ा का पीटते थे।क्यों वह झुक कर डॉगी बन लण्ड लेने को सरताज हुई?
जस्सूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। सुनीता जस्सूजी के ऊपर उनका लण्ड अपनी चूत में लिए हुए जस्सूजी को प्यार भरा चुंबन कर रही थी। अपनी गाँड़ थोड़ी ऊपर की और उठा कर वह सुनीलजी यानी अपने पति से अपनी गाँड़ के छिद्र में चिकना तेल या ऑइंटमेंट डलवा कर उसे स्निग्ध करवा रही थी। सुनीलजी का लण्ड पहले जितना कडा तो रहा नहीं था फिर भी सुनीलजी का मन पहली बार अपनी बीबी सुनीता की गाँड़ मारने के लिए मचल रहा था।
अपनी बीबी की गाँड़ में अच्छी तरह चिकनाहट भरा तेल डालने के बाद सुनीलजी ने अपना लण्ड अपने हाथ में पकड़ा और उसे अपनी बीबी की गाँड़ के छिद्र के द्वार पर टिका दिया और एक हल्का धक्का मारा। एक तो सुनीलजी का लण्ड ढीला पड़ गया था। दूसरे वह तेल से लबालब लिपटा हुआ था सो एकदम सरसराता हुआ वह सुनीता की गाँड़ में घुस गया।
इतनी आसानी से अपना लण्ड घुस गया यह देख …