This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
अपने पति के मुह से कर्नल साहब और खुद के सम्बन्ध की एक बात सुन कर ही सुनीता के झनझना सा उठा.
कहीं उसके पति कर्नल साहब से जल तो नहीं रहे? कहीं उनको उसके और कर्नल साहब के रिश्ते पर कोई शक तो नहीं हो रहा? अनजाने में ही सुनील की पत्नी के चेहरे पर लज्जा और शर्म की लालिमा छा गयी।
उसने झिझकते घबराते हुए पूछा, “डार्लिंग तुम मेरे और कर्नल साहब के रिश्ते के बारे में कहीं गलत तो नहीं सोच रहे?”
सुनील जोरदार ठहाका लगा कर हंसने लगा। उसने कहा, “नहीं डार्लिंग नहीं। ऐसा बिलकुल नहीं है। तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो? क्या मेरे कहने का यह मतलब था? मैं तो जो मर्दों के मन के भाव होते हैं वह तुम्हें बता रहा था, ताकि तुम कुछ गलत ना सोचो। तुम पर मुझे अपने से भी ज्यादा भरोसा है। और उससे भी कहीं ज्यादा मुझे कर्नल साहब पर भरोसा है। और हाँ डार्लिंग, एक बात और बताऊँ? मैं तुम्हें और कर्नल साहब को इतना चाहता हूँ की अगर ऐसा वैसा कुछ हो भी जाए तो यह ज़रा भी मत सोचना की मैं तुम पर कभी कोई तरह की आंच आने दूंगा।”
यह सुनकर सुनीता की आँखें झलझला उठीं। वह अपने पति के इतने विश्वास से गदगद हो गयी। सुनीता का गला रुंध गया। वह कुछ बोल ना पा रही थी।
सुनीता ने अपने पति सुनील को गले लगाया और बोली, …