This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
सुनीता ने जस्सूजी की और देखा और अपना पेंडू से ऊपर धक्का मारकर जस्सूजी का लण्ड थोड़ा और अंदर घुसड़ने की कोशिश की। जस्सूजी समझ गए की सुनीता कितना ही दर्द हो, चुदाई को रुकने देना नहीं चाहती।
जस्सूजी भी तो रुकना नहीं चाहते थे। आज तो एक साथ दो काम सफल हुए। एक तो सुनीता को चोद ने का मौक़ा मिला और दूसरे सुनीता के पति की न सिर्फ पूर्ण सहमति बल्कि उनका साथ भी मिला।
किसीकी बीबी को उसकी सहमति के साथ चोदना एक बात है, पर उसके पति की सहमति से उसे चोदने का मजा ही कुछ और है। और जब पति भी साथ में सामने बैठ कर अपनी पत्नी की चुदाई ख़ुशी ख़ुशी देखता हो तो बात कुछ और ही होती है।
यह तो जिन्होंने अनुभव किया होगा वह ही जान सकते हैं। जब ऐसा होता है तो इसका मतलब है की आप अपना स्वार्थ, अहंकार और अपना सर्वस्व एक दूसरे के प्यार के लिए न्योछावर कर रहे हो। इसका मतलब है ना सिर्फ आप अपने दोस्त को बल्कि आप अपनी बीबी को भी बहुत ज्यादा प्यार करते हो।
पर इससे भी एक और बात उभर कर आती है। एक शादीशुदा औरत का एक पराये मर्द से चोरी छुपके चुदवाना अक्सर होता रहता है। यह कोई नयी बात नहीं है।
पर उस औरत का अपने मर्द की सहमति से या अपने मर्द के …