This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
यह प्यार दीवाना पागल है। ना जाने क्या करवाता है। कभी प्यारी को खुद ही चोदे, कभी औरों से चुदवाता है।
जस्सूजी ने पहले सुनीता के कपाल पर और फिर सुनीता के बालों पर, नाक पर, दोनों आँखों पर, सुनीता के गालों पर और फिर होँठों पर चुम्बन किया। जस्सूजी सुनीता के होँठों पर तो जैसे थम ही गए। सुनीता के होँठों के रस से वह रसपान करते थकते नहीं थे। जस्सूजी ने सुनीता को अपनी बाँहों में ले लिया और सुनीता के होँठों से अपने होँठ कस कर भींच कर बोले, “सुनीता, मैं तुम्हें अपनी बनाना चाहता हूँ। क्या तुम मुझे अपना सर्वस्व अर्पण करने के लिए तैयार हो?”
सुनीता बेचारी बोल ही कैसे सकती थी जब उसके होँठ जस्सूजी के होँठों से जैसे सील ही गए हों? फिर भी सुनीता ने अपनी आँखें खोलीं और जस्सूजी की आँखों से ऑंखें मिलाई और और अपना सर ऊपर निचे हिला कर उसने अपनी सहमति जताई। सुनीता की आँखों में उस समय उन्माद छाया हुआ था। आज वह अपने पति के सामने अपने प्रियतम से प्यार का ना सिर्फ इजहार करने वाली थी बल्कि अपने प्यार को अपने पति से अधिपत्य (ऑथॉरिज़ेशन) भी करवाना चाहती थी। सुनीता समझ गयी थी की उस दिन उसे जस्सूजी उसके पति के देखते हुए चोदेंगे।
सुनीता के पति सुनीलजी की ना सिर्फ इसमें सहमति थी बल्कि …