This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
मेरे अति प्रिय पाठक गण, आपको कहानी का एक चैप्टर पढ़ते हुए शायद चंद मिनट लगते हैं जिसे लिखने में मुझे दो या तीन दिन लगते हैं। मैं आप सब की तरह ही एक साधारण व्यस्त आदमी हूँ।
मुझे यह कहानी लिखते हुए जो समय लगता उसका सिर्फ एक ही पारितोषिक है पाठकों का प्यार और प्रशंशा। अगर आप कमैंट्स लिखेंगे नहीं तो मुझे कैसे पता चलेगा की मेरी कहानी आप को पसंद आयी या नहीं? और अगर आप नहीं लिखेंगे तो मुझे लगता है, मैं अपना इतना सारा समय क्यों जाया करूँ? आगे आप सोचिये और समझिये।
वापस आइये कहानी पर…———–सुनीता ने अपने पति सुनीलजी की और अपना सर घुमा कर देखा और कहा, “देखिये आज आपने दो दुश्मन के फौजी और आतंकवादी को मार दिए इससे आप को इतनी ज्यादा रंजिश हुई और आप इतना दुखी हुए। हमारे फौजी नवजवानों को देखिये। लड़ाई में वह ना सिर्फ दुश्मनों को मौत के घाट उतारते हैं, वह खुद दुश्मनों की गोली पर बलिदान होते हैं। देश के लिए वह कितना बड़ा बलिदान है? जस्सूजीने वह कालिये को मारने में एक सेकंड का भी समय जाया नहीं किया। अगर उस कालिये को चंद सेकंड ही मिल जाते तो वह हम सब को मार देता।”
फिर सुनीता ने वापस जस्सूजी की और घूम का देखा और बोली, “जस्सूजी, आप ने हम सब पर इतने एहसान किये …