This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
घंटों की थकान और नींद की कमी के कारण सुनीता और जस्सूजी दोनों थके हुए तो थे। पर कुछ घंटों के आराम क बाद हालांकि उनकी थकाहट पूरी तरह खत्म तो नहीं हुई थी, फिर भी उनमें इतनी ऊर्जा का संचार ह चुका था की वह दोनों और ख़ास कर सुनीता जस्सूजी के तगड़े लण्ड को और अपनी प्यासी चूत को ज़रा भी आराम करने देना नहीं चाहती थी।
दोनों को एक दूसरे से पहली मुलाक़ात के महीनों के बाद पहली बार ऐसा मौक़ा मिला था जब उनकी महीनों की चाहत पूरी होने जा रही थी। आराम करने का मौक़ा तो आगे चलकर खूब मिलेगा पर क्या पता ऐसे एक दूसरे के नंग्न बदन को इतने प्यार से लिपटने का और एक दूसरे के बदन को इतने एक दूसरे में मिलाने का मौक़ा नाजाने फिर कब मिले? और अगर मिलेगा भी तो इन वादियों और ऐसे खुशनुमा नज़ारे में तो शायद ही मिले।
यह सोच कर दोनों प्रेमी एक दूसरे के बदन को छोड़ना ही नहीं चाहते थे। भगवान् ने भी क्या दुनिया बनायी है? जब आप एक दूसरे को इतना चाहते हो तो एक पुरुष और एक स्त्री अपने प्यार का इजहार कैसे करे? भगवान् ने सेक्स याने चुदाई का एक जरिया ऐसा दिया जिससे वह दोनों एक दूसरे के अंदरूनी उत्कट प्यार को अपने शरीर की जुबान से चुदाई द्वारा प्रकट कर सकते हैं।
समाज ने ऐसे प्यार भरी चुदाई पर कई अलग अलग तरह के …