This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
जस्सूजी ने देखा की सुनीता पानी के अंदर रुक गयी पर एक ही जगह भँवर के कारण गोल गोल घूम रही थी। पानी में खतरनाक भँवर हो रहे थे। उस भँवर में फंसना मतलब अच्छे खासे तैराक के लिए भी जानका खतरा हो सकता था।
अगर उन्होंने सुनीता को फ़ौरन पकड़ा नहीं और सुनीता पानी के भँवर में बिच की और चली गयी तो सीधी ही अंदर चली जायेगी और दम घुटने से और ज्यादा पानी पीने से उसकी जान भी जा सकती थी।
पर दूसरी तरफ एक और खतरा भी था। अगर वह अंदर चले गए तो उनकी जान को भी कोई कम ख़तरा नहीं था। एक बार भँवर में फँसने का मतलब उनके लिए भी जान जोखिम में डालना था। पर जस्सूजी उस समय अपनी जान से ज्यादा सुनीता की जान की चिंता में थे।
बिना सोचे समझे जस्सूजी भँवर के पास पहुँच गए और तेजी से तैरते हुए सुनिताका हाथ इन्होने थाम लिया। जैसे ही सुनीता भँवर में फँसी तो उसने अपने बचने की आशा खो दी …