This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
जिस दिन कर्नल साहब की औपचारिक रूप से सुनील और उसकी पत्नी सुनीता से पहली बार सुनील और सुनीता के घर में मुलाक़ात हुई और कर्नल साहब का पहले गरम और बाद में सुनीता को देख कर नरम होना हुआ.
उस रात को सुनील ने अपनी पत्नी सुनीता को हलके फुल्के लहजे में कहा, “लगता है, कर्नल साहब पर तुम्हारा जादू चल गया है। आज तो तुम्हें वह बड़े घूर घूर कर देख रहे थे। तुम भी तो कर्नल साहब को देख कर चालु हो गयी थी! कहीं तुम भी तो?…”
सुनीता हँस कर नकली गुस्से में सुनील की छाती पर हल्का सा घूँसा मार कर बोली, “धत्त! क्या पागलों जैसी बात कर रहे हो। ऐसी कोई बात नहीं है। कर्नल साहब हमारे पडोसी हैं। अगर मैं इतनी लम्बी और मोटी उनके सामने बैठूंगी या खड़ी रहूंगी, तो उनको मेरे अलावा कुछ दिखाई भी तो नहीं देगा। तब तो वह मुझे ही देखेंगे ना? तुम ना हर बार कुछ ना कुछ उलटा पुल्टा सोचते रहते हो। तुम्हें हमेशा कोई ना कोई नयी शरारत सूझती रहती है। वह बड़े चुस्त और तंदुरस्त हैं। रोज सुबह वह कैसी …