This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
कुमार की चोटें गहरी थीं और शायद कोई हड्डी नहीं टूटी थी पर मांसपेशियों में काफी जख्म लगे थे और बदन में दर्द था। नीतू के कप्तान कुमार के बर्थ पर ही लम्बे होने से कुमार के बदन का कुछ हिस्सा दबा और दर्द होने के कारण कप्तान कुमार कराह उठे।
नीतू एकदम बैठ गयी और उठ कर कुमार के पाँव के पास जा बैठी। कुमार के पाँव को अपनी गोद में रख कर उस पर कम्बल डालकर वह हल्के से कुमार के पाँव को सहलाने लगी।
फिर नीतू की अपनी आँखें भी भारी हो रही थीं। नीतू बैठे बैठे ही कुमार के पाँव अपनी गोद में लिए हुए सो गयी।
नीतू के सोने के कुछ देर बाद नीतू के पति ब्रिगेडियर खन्ना नीतू को मिलने के लिए नीतू की बर्थ के पास पहुँचने वाले थे, तब सुनीता ने उन्हें देखा।
सुनीता को डर था की कहीं नीतू के पति नीतू को कुमार के साथ कोई ऐसी वैसी हरकत करते हुए देख ना ले इसलिए वह ब्रिगेडियर साहब को नमस्ते करती हुई एकदम उठ खड़ी हुई और जस्सूजी के पाँव थोड़े से खिसका कर सुनीता ने ब्रिगेडियर साहब को अपने पास बैठाया।
सुनीता ने ब्रिगेडियर खन्ना साहब से कहा की उस समय नीतू सो रही थी और उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं था। सुनीता ने फिर ब्रिगेडियर खन्ना साहब को समझा …