This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
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ज्योति ने अचम्भे से सुनीता की और देखा और बोली, “अच्छा? इसका मतलब सुनील जी भी कर्नल साहब से कुछ कम नहीं है।”
सुनीता ने ज्योतिजी से पूछा “दीदी आप कह रही थीं ना की आपको बदन में काफी दर्द है तो आप अब लेट जाओ, मैं आपका थोड़ा हल्का फुल्का मसाज कर देती हूँ। ”
सुनीता की प्यार भरी बात सुनकर ज्योतिजी बड़ी खुश हुई और बोली, “हाँ बहन अगर थोड़ी वर्जिश हो जायेगी तो बेहतर लगेगा। मैं सोच तो रही थी की तुझे कहूं की थोड़ी मालिश कर दे पर हिचकिचा रही थी।”
सुनीता ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, ” जाइये, मैं आपसे बात नहीं करती। एक तरफ तो आप मुझे छोटी बहन कहती हो और फिर ऐसे छोटी सी बात के लिए हिचकिचाती हो? देखिये दीदी, जिस तरह से आपने मुझमें इतना विश्वास जताया है (सुनीता ने ज्योतिजी के नंगे बदन की और इशारा किया), की अब हम ना सिर्फ सहेलियां और बहनें हैं बल्कि हमारा रिश्ता उससे भी बढ़ कर है जिसका कोई नाम नहीं है। अब मुझसे ऐसी छोटी सी बात के लिए हिचकिचाना ठीक नहीं लगता दीदी।”
ज्योतिजी सुनीता की और देख कर मुस्कुरायी और बोली, “माफ़ करना बहन। मैंने ऐसा सोचा नहीं था। पर तुम ठीक कह रही हो। अब मैं ऐसा नहीं करुँगी।”
“अब आप चुपचाप उलटी लेट जाइये।” सुनीता ने अपना अधिकार जताते हुए कहा।
ज्योति आज्ञाकारी बच्ची …