This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
सुनीता ज्योतिजी का यह रूप पहली बार देख रही थी। वह जानती थी की ज्योति जी साफ़ साफ़ बोलती हैं। पर वह इतना खुल्लमखुल्ला चोदना, चुदाई, लण्ड, चूत बगैरह इस तरह बेबाक बोलेंगी उसकी तो कल्पना भी सुनीता ने नहीं की थी।
ज्योतिजी बिना रुके बोले जा रही थीं। “दूसरी मुलाक़ात में मैंने जस्सूजी को साफ़ साफ़ कह दिया की मैं उनसे चुदवाना चाहती थी। जस्सूजी मुझे आँखें फाड़ कर देखते रहे! उन्हें तब तक मेरे जैसी मुंहफाड़ स्त्री नहीं मिली थी। वह क्या कहते? मुझ पर तो वह पहले से ही फ़िदा थे!
बस हम दोनों ने उसी दिन उसी क्लब में कमरा ले कर पहली बार घमासान चुदाई की। और मैंने उनसे शादी से काफी पहले दूसरी मुलाक़ात में ही चुदवाया। जब मेरी उन्होंने जम कर चुदाई की तब मैंने वहाँ ही तय कर लिया था की मैं उनसे बार बार चुदवाना चाहती थी। मैं जस्सूजी से शादी करना चाहती थी। मैं उनके बच्चों की माँ बनना चाहती थी।
शुरू में जस्सूजी मुझसे शादी करने के लिए इस लिए तैयार नहीं थे की मेरे साथ शादी करने से उनकी आझादी छीन जा रही थी। शादी के पहले उनपर कई लडकियां और औरतें ना सिर्फ फ़िदा थीं पर उनके साथ सोने के लिए मतलब चुदने के लिए भी आती थीं। पर …