This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
परदे पर हर पल बढ़ते जाते उत्तेजक दृश्य से सुनील और ज्योति की धड़कनों की रफ़्तार धीमा होने का नाम नहीं ले रही थी। सुनील जी का हाथ अपनी गोद में महसूस कर ज्योति के ह्रदय की धड़कनें इतने जोर से धड़क रहीं थीं की ज्योति डर रही थी की कहीं उसकी नसें इस उत्तेजना में फट ना जाएँ।
उसी उत्तेजना में ज्योति सुनीलजी के लण्ड को पतलून के ऊपर से ही धीरे से सेहला रही थी। शायद उसे सुनील जी को अपने मन की बात का संकेत देना था।
सुनील समझ गए की ज्योति को सुनील के आगे बढ़ने में कोई एतराज नहीं था। शायद इस निष्क्रियता से वह अपनी मर्जी भी जाहिर कर रही थी। सुनील ने अपना हाथ कर्नल साहब की बीबी की दो टांगों के बिच सरका दिया।
ज्योति ने सहज रूप से ही बरबस अपनी टांगें खोल दीं। सुनीलजी का हाथ सरक कर ज्योति की जाँघों के बिच की वह जगह पर पड़ा जो ज्योति का सबसे बड़ा कमजोर बिंदु था।
सुनील की पत्नी सुनीता भी बड़े ही असमंजस में फँसी हुई थी। जस्सूजी सुनीता का हाथ अपनी …