This story is part of the Train me ek raat: Maya ki kaya series
मित्रो, रात के ००:४५ बजे जब कैफियत एक्सप्रेस कानपुर से खुली, तो मेरा मन दुखी था, लेकिन कुछ पल में ही एक औरत मेरे सामने वाले बर्थ पर आकर बैठ गयी।
फिर दीपक अपने बर्थ के बिस्तर को ठीक करके उस औरत को घूरने लग गया, प्रथम वातानुकूलित डब्बे के मेरे कूप में मै और वो औरत थीl तो दो बर्थ खाली ही थे और मै भगवान से प्रार्थना कर रहा था, कि कोई और यात्री उस कूप में ना आए।
ट्रेन खुलने के कुछ पल बाद एक औरत जोकि करीब ३७-३८ साल की होगी, वो मेरे सामने के बर्थ पर बैठ कर अपने सांसों को नियंत्रित कर रही थी। उसका सामान बर्थ के नीचे पड़ा हुआ था, तो वो साड़ी और ब्लाऊज पहनकर मस्त दिख रही थी। लेकिन वो मेरी मां की उम्र की औरत मेरे गंदे मन को जान भी नहीं सकती थी।
कुछ देर …