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पड़ोसन बनी दुल्हन-2

This story is part of the Padosan bani dulhan series शुरू में तो सुषमाजी ने उनका काफी साथ दिया और खूब चुदवाया, पर वह थक जाती थी। उनके लिए सेठी साहब की ताकत और जोश के साथ कदम से कदम मिलाना कठिन था। धीरे धीरे वह तंग होने लगी। सुषमाजी चुदाई एन्जॉय तो करती थी पर इतनी रफ़ नहीं। वह चाहती थी की चुदाई प्यार से धीरे से होनी चाहिए। पर सेठी साहब को रफ़ चुदाई के बगैर चैन नहीं पड़ता था। सेठी साहब जब चिपक पड़ते थे तो चाटना, काटना, गाँड़ पर चपेट मारते रहना इत्यादि किये बगैर उन्हें संतुष्टी नहीं होती थी। सुषमाजी बेचारी जब फारिग होती थी तब गाल, स्तन, पेट, हाथ, जांघें आदि लाल लाल हो जाते थे और उन पर सेठी साहब के दांतों के निशान होते थे। कई बार तो बेचारी सुषमाजी चलने की हालात में भी नहीं होती थीं। सेठी साहब ने कहा, “अब यह हाल है की सुषमा मुझे रातको पलंग में अवॉयड करने की कोशिश करती है। आजकल हमारे बिच कुछ ऐसा पेंच फँसा हुआ है की पता नहीं कैसे निकलेगा।” यह कह कर कुछ देर सेठी साहब चुप हो गए। फिर मेरी और देख कर बोले, “हो सकता है तुम मेरी कुछ …

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