मैं रंडी जरूर हूँ लेकिन हूँ तो इंसान ही … मुझे भी दर्द होता है. आज तुमने जैसी मेरी चुदाई की है, ऐसी चुदाई मेरी शादी के बाद हुई थी. उस वक़्त मैं इतना ज्यादा चिल्लाई थी.
मेरी सेक्स कहानी के पिछले भागचूत चुदाई की हवस कॉलगर्ल से बुझी-4में आपने पढ़ा कि मैंने उसी कालगर्ल को फिर से बुला कर चोदा था और झड़ गया था.
अब आगे:
फिर हम दोनों बाथरूम गए. उसने मेरे लंड से कंडोम को हाथ में लेकर कहा- आज तो कुछ ज्यादा ही झड़ गए हो.उसने कंडोम को डस्टबिन में फेंक दिया और पानी से मेरा लंड साफ़ कर दिया. इसके बाद उसने अपनी चूत भी साफ़ कर ली.
फिर हम दोनों एक-दूसरे के नंगे बदन को पकड़े हुए वापस बिस्तर पर आ गए.
बिस्तर पर आने के बाद उसने कहा- आज तो तुमने मुझे मार ही डाला था. इतना जोर से कोई करता है क्या? मैं रंडी जरूर हूँ, लेकिन हूँ तो इंसान ही … मुझे भी दर्द होता है. आज तुमने जैसी मेरी चुदाई की है, ऐसी चुदाई मेरी शादी के बाद हुई थी. उस वक़्त मैं इतना ज्यादा चिल्लाई थी, उस वक़्त जो दर्द हुआ था, वो आज हुआ है. सच में आज से पहले मेरी इतनी ताबड़तोड़ चुदाई किसी ने नहीं की है. तुमने मेरी प्यास बुझा दी.
कल्पना के चेहरे पर उसकी संतुष्टि साफ़ दिखाई दे रही …