This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
कैप्टेन कुमार और नीतू भीगी बिल्ली की तरह कर्नल साहब के पीछे पीछे चलते हुए मुख्य राह पर पहुँच गए। इस बार जान बुझ कर जस्सूजी ने सुनीता से कुमार और नीतू की और इशारा कर धीरे चलने को कहा।
नीतू और कुमार की मैथुन लीला देखने के बाद सुनीता को जस्सूजी का रवैया काफी बदला हुआ नजर आया। अब वह उनकी कामनाओं और भावनाओं की कदर करते हुए नजर आये।
रास्ते से भटक जाने के लिए पहले शायद वह कैप्टेन कुमार को आड़े हाथों ले लेते। पर उन्होंने जब दोनों के बिच का आकर्षण और उत्कट प्यार देखा तो कुमार को थोड़ी सी डाँट लगा कर छोड़ दिया।
कर्नल साहब अब धीरे धीरे समझ रहे थे की जो कामबाण उनके और सुनीता के ह्रदय को घायल कर रहा था वही कामबाण कप्तान कुमार और नीतू के ह्रदय को भी घायल कर रहा था।
जब प्यार के कामबाण का तीर चलता है तो वह उम्र, जाती, समय, समाज का लिहाज नहीं करता। शादीशुदा हो या कंवारे, बच्चों के माँ बाप हों हो या विधवा हो, इंसान घायल हो ही जाता है।
हाँ, यह सच है की समाज ऐसी हरकतों को पसंद नहीं करता और इसी लिए अक्सर यह सब कारोबार चोरी छुप्पी चलता है। आखिर कर्नल साहब और सुनीता भी तो शादीशुदा थे।
नीतू और कुमार की मैथुन लीला देखने के बाद कर्नल साहब …