This story is part of the Sanjha Bistar, Sanjhi Biwiyan series
जैसे ही रानी के कुछ बोलने की चेष्टा की, फ़ौरन कमल ने अपने होंठ रानी के होठों से चिपका दिए और बोला, “रानी, अब कुछ मत बोलो। जो होगा वह होने दो। अब मैं रुकने वाला नहीं। जिस दिन से मैंने तुम्हें पहली बार देखा था उस दिन से मैं इस दिन का इंतजार कर रहा था।”
और बिना समय गँवाए कमल ने अपना हाथ रानी के घाघरे में डाल कर घाघरे का नाडा खोल दिया। देखते ही देखते रानी का फैला हुआ घाघरा फर्श पर जा गिरा।
रानी सिर्फ पेंटी पहने हुए अपने स्तनों को अपने हाथों से छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए खड़ी शर्म के मारे मरी जा रही थी।
छोटी पेंटी में से रानी के झांटों के बाल भी दिख रहे थे। रानी की समझ में नहीं आ रहा था की वह हाथों से अपने स्तनों को छुपाये या अपनी चूत को।
राज और कुमुद दोनों रानी के आधे नंगे बदन को बाहर से देखते ही रह गए। यह राज की जिंदगी का पहला मौक़ा था जब राज को अपनी पत्नी रानी के नंगे बदन को अपने ही …