संदीप के झाड़ते ही मैंने चैन की सांस भी पूरी नहीं ली थी कि कुछ ही सेकंड में अब रौनक मेरी दोनों टांगो को चौड़ा कर बीच में आकर बैठ गया। मैं भी चाहती थी कि दो लोग करेंगे तो बच्चा होने की सम्भावना बढ़ जाएगी परन्तु थोड़ा ब्रेक तो मुझे भी चाहिए था।
उसने मेरा साइड में पड़ा गाउन उठाया और मेरी योनी पर लगा पानी साफ़ करने लगा जो संदीप छोड़ कर गया था। अब उसने अपना लंड पकड़ कर मेरे छेद में डालना शुरू किया।
थोड़ी देर पहले उसका मुँह में लेने से ही मुझे उसकी मोटाई का अंदाजा था। मुँह में बड़ी मुश्किल से समां रहा था तो नीचे के छोटे छेद में कैसे जायेगा ये सोच मैं घबरा गयी।
वैसा ही हुआ, दो इंच भी अंदर नहीं गया और अटक गया, मेरी तो हालत खराब हो गयी इतने में ही। उसने थोड़ा जोर लगाने की कोशिश की पर कामयाब नहीं हुआ, उल्टा मुझे दर्द हुआ और थोड़ी चीख निकल गयी।
संदीप ने पीछे से उसको बोला कि सारा लुब्रीकेंट तो तूने साफ़ कर दिया अब सूखे में कैसे जाएगा, पहले गीला …