This story is part of the Pooja Ki Pooja series
जैसे तैसे कुछ तिकड़म करके एक दिन मैंने पूजा को एक जगह पकड़ ही लिया। मुझे देख कर वह घबरा सी गयी। मैंने उसे पूछा, “अरे भाई, अगर तुम्हें मुझसे कोई शिकायत है या फिर कोई आपत्ति है तो बताओ तो सही। ऐसे भागने से तो काम नहीं होगा ना?”
पूजा ने कहा, “मैं तुम्हें नहीं मिल सकती। मेरी शादी किसी और से तय हो रही है।”
यह सुनकर मुझ पर जैसे एक वज्राघात हुआ। मैंने उसकी और देखकर पूछा, “ऐसा क्या हुआ? क्या तुम मना नहीं कर सकती थी? मुझमें क्या बुराई है?”
पूजा ने कहा, “बात मेरी मर्जी की नहीं है। मेरे पापा नहीं मान रहे। उन्होंने अपना सुसाइड करने की बात तक कर दी है।”
मेरी आँखों में आँसूं आ गए। मैंने कहा, “तो बताओ, …