हैलो दोस्तो, मैं अर्शदीप कौर उर्फ चुद्द्कड़ अर्श आपके सामने एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूं। कहानी शुरू करने से पहले सभी पाठकों को प्यार भरा सलाम और खड़े लंडों को चूमते हुए बहुत सारा प्यार।
मैं उम्मीद करती हूं कि इस कहानी को पढ़ने के बाद सभी लड़कों, शादीशुदा मर्दों और बड़ी आयु के मर्दों के लंड टाईट हो जाएंगें। जो मर्द और औरतें चुदाई का जुगाड़ कर सकती हैं वो चुदाई करेंगे और जो नहीं कर सकते वो लड़के सपने में मुझे चोदते हुए लंड हिलाएंगे तथा लड़कियां दमदार लंड को सपने में सोच कर चूत में ऊंगली करेंगी।
ये कहानी कुछ महीने पहले की है। मैं अंबाला किसी काम से आई थी। वहां मेरा काम खत्म होने के बाद आखरी बस मिल गई और मैं टिकट लेकर बस में चढ़ गई। उस टाईम शाम के सात बज रहे थे और अंधेरा हो चुका था। मैंने उस टाईम सफेद टाईट शर्ट, काली जींस, काले हाई हील के सैंडिल, सफेद ब्रा एवं पैंटी पहन रखे थे।
बस में भीड़ होने की वजह से मुझे खड़ी होना पड़ा। पहले तो भीड़ ठीक-ठाक थी लेकिन बस के चलने तक भीड़ काफी ज्यादा हो गई और लोग एक-दूसरे के बीच फंस कर खड़े थे। मेरे आगे-पीछे पीछे दोनों तरफ मर्द खड़े थे और मैं उनके बीच फंसी हुई थी। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे हैं।
पहले तो मुझे लगा कहां आ गई वहीं अंबाला में अपनी सहेली के घर रुक जाती लेकिन कुछ देर में पिछले मर्द का लंड खड़ा होकर जींस के ऊपर से मेरी गांड पर टकराने लगा। मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और सोचा कि सफर मजेदार रहेगा। करीब साढ़े 7 बजे बस चल पड़ी और लाईटें बंद हो गईं। जैसे ही लाईटें बंद हुईं पीछे वाले मर्द की हलचल बढ़ गई।
वो मेरी गांड पर अपना लंड दबाने लगा और हल्के से अपने हाथ से मेरी गांड सहला देता। शायद वो डर रहा था इसलिए जब मैं हिलती तो वो थोड़ा पीछे हट जाता। मैंने पहले उसका डर दूर करने की सोची। इस बार जब उसने मेरी गांड पर लंड दबाया तो मैंने भी अपनी गांड पीछे कर दी और उसके लंड पर धीरे-धीरे अपनी गांड हिलाने लगी।
उसने इस बार जोर से मेरी गांड पर हाथ रखा और मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने …