This story is part of the Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti series
एक दिन मैं जैसे ही मेट्रो स्टेशन पहुंची और टिकट चेकिंग मशीन की कतार में खड़ी हुई और मैंने कार्ड निकालने के लिए अपना पर्स खोला तो मुझे ध्यान आया की मैं अपना मेट्रो कार्ड घर पर छोड़ आयी थी।
नया कार्ड बनवाना मतलब पैसे दुबारा भरना। कॅश की कतार लम्बी थी। मैं उलझन में इधर उधर देख रही थी की पीछे कतार में खड़े एक लम्बे पुरुष ने मेरी और देखा। वह थोड़ा मुस्कुराया और उसने पूछा, “क्या आप अपना कार्ड घर भूल आयी हैं?”
मैंने अपना सर हिला कर हामी भरी और कहा की सुबह नाश्ता करते हुए जल्दी में मैं कार्ड घर में टेबल पर ही छोड़ कर आ गयी थी। फ़ौरन उन्होंने अपना कार्ड निकाला और मेरे हाथों में थमा दिया और कहा, “इसे ले लो और चलो।”
मैंने जब कुछ देर झिझक कर उसकी और देखा तो बोला, ” मेरी चिंता मत करो। मेरे पास दुसरा कार्ड है। मैं हमेशा दो कार्ड रखता हूँ। जब कभी एक में पैसे कम पड़ …