This story is part of the Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti series
कॉफी आर्डर करने के बाद मैं योग से मेरे तीखे रवैय्ये के बारे में माफ़ी मांगने लगी.
तो योग ने अपने हाथों को घुमा कर कहा, “यह सब फ़ालतू बात छोडो, बोलो तुम्हें क्या चाहिए?”
मैंने कहा मुझे इनकी मदद चाहिए और फिर मैंने उन्हें वह सब कहा जो उनको मैं पहले भी बता चुकी थी।
बीच में ही मेरी बात को काटकर वह बोले, “पर मैं आपकी मदद क्यों करूँ?”
मुझे पता था की उनका जवाब यही होगा। तब मैंने उन्हें कहा की कंपनी के लिए यह प्रोग्राम बड़ा ही जरुरी है, जिसमें मुझे उनका सहयोग चाहिए।
योग ने बड़े ही रूखे अंदाज में कहा, “आपको वाईस प्रेजिडेंट के पास जाने के लिए मैं पहले ही कहा था। वह मेरे भी बॉस हैं। अगर वह कहेंगे तो मुझे आपका काम करना ही पडेगा। आखिर में आपने अभी अभी कहा की आपका काम कंपनी के फायदे में है। तो फिर आप उनके पास क्यों नहीं जाती?”
हालांकि मैं जानती थी योग यह सब कहेंगे, पर फिर भी मेरी धीरज जवाब दे रही थी। मैं गुस्से हो रही थी। तब मुझे ख्याल आया की उस प्रोग्राम के पीछे ना सिर्फ मेरी परन्तु मेरे साथीदारों की करियर भी दाँव पर लगी थी। वह सब मुझ से …