This story is part of the Padosan bani dulhan series
यह कह कर सुषमा बिना कोई चिंता के मेरे ऊपर मरे बदन को अपनी नंगी करारी टाँगों के बिच में ले कर मेरे ऊपर सवार हो गयी और अपनी चूत को मेरे लण्ड के करीब लाकर मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत की पंखुड़ियों के केंद्र बिंदु पर सटा दिया।
सुषमा अब मुझे चोदने के लिए तैयार हो गयी। सुषमा के मस्त स्तन सुषमा की उस मुद्रा में भी थोड़ा सा भी झुके और लटके बिना फुले भरे हुए अपनी निप्पलों के सख्त शिखर को अपनी चोटी में रखे हुए उन्नत, अल्लड़ और उच्छृंखल से अपनी उद्दंडता दिखा रहे थे।
मैंने मेरे लण्ड को सुषमा की चूत में सेट करते हुए ऊपर की और एक धक्का दिया। सुषमा के बदन के वजन से और चिकनाहट से लथपथ मेरा लण्ड सुषमा की चूत में जैसे मक्खन के ब्लॉक में छुरी घुस जाती है ऐसे पूरा का पूरा अंदर घुस गया।
सुषमा की आँखों के मटकने से मैं समझ गया की उसे भी मेरे लण्ड के उसकी बच्चेदानी तक घुस जाने से एक रोमांचक भाव जरूर महसूस हुआ होगा। सुषमा की चूत की वही कम्पन तब मैंने कहीं ज्यादा …