जब मैंने मंजू के नंगे स्तन देखे तो मैं पागल सा हो गया। मेरा मन किया की मैं भी अंदर घुस जाऊं और मंजू की चूचियों को चूसने लगूं और उसकी फूली हुई निप्पलों को काट कर लाल करदूँ। पर सब मुझे छोटा मानते थे। देव लगा हुआ था तो मेरा नंबर कहा लगने वाला था? खैर, मैं मन मारकर अपने लण्ड को हिलाता हुआ, जो अंदर चल रहा था वह अद्भूत दृश्य देखने में जुट गया।
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देव के दोनों हाथ मंजू को चरम सीमा रेखा पर पहुंचाने में ब्यस्त थे। मंजू की आँखें बंद थीं और वह पूरी तरह से देव के एक हाथ से उंगली चोदन और दूसरे हाथ से अपने स्तनों को जोश से दबवाने का उन्माद भरा आनंद अपनी आखें बंद कर महसूस कर रही थी। मुझे लगा की उसके बदन में अचानक जैसे कोई भूत ने प्रवेश किया हो ऐसे मंजू का बदन कांपने लगा।
मैं अचम्भे में पड गया की यह मंजू को क्या हो गया। मंजू के मुंहसे आह… आह… निकलने लगी। मंजू जो कुछ समय पहले देव से भाग रही थी अब देव को चोदने के लिए बिनती कर रही थी। उस के मुंह से बार बार, “ओह… देव… आह… ओह… आह.. मुझे चोदो और.. और…” मंजू का बदन इतने जोर से हिलने लगा की साथ साथ मेरा पूरा पलंग भी उसके साथ हिल रहा था। और फिर अचानक एक झटके में वह शांत हो गयी।
इतनी फुर्ती से मंजू की टांगों के बिच में उसकी चूत में से अपने हाथ और उँगलियों को अंदर बाहर करते हुए देव भी थोड़ा सा थक गया था। थोड़ी देर के लिए दोनों शांत हो गए। मैंने देखा की मंजू पलंग पर से थोड़ी उठी और उसने देव को उसकी बाहों में लेने के लिए अपनी बाहें उठायीं। देव खड़ा हुआ। उसका लंबा घंट जैसा लण्ड एकदम्म कड़क खड़ा हुआ था। वह अपना लण्ड एक हाथ से सेहला रहा था। मंजू ने देव का लण्ड अपनी एक हथेली में पकड़ा और उसे हिलाती हुई वह पलंग पर ठीक तरह से लम्बी होती …