अगले दिन मैं सीट पर बैठ गई और वो भी साथ बैठ गया। मैंने उसको कहा राजपाल जी थैंक्स आप मेरे लिए सीट रखते हो। उसने कहा मैंने तो दोस्त समझ कर सीट रखी है अगर तुम भी दोस्त समझती हो तो राजपाल नहीं सिर्फ राज कहना और आप की जगह तुम।
मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसने कहा ये बात सही है कि मैं आयु में तुमसे बहुत बड़ा हूं लेकिन दोस्ती में आयु नहीं देखी जाती बाकी तुम्हारी मर्जी जो सही लगे पर सीट मिलती रहेगी। मैंने कहा ऐसी बात नहीं राज मैं तो खुश हो रही थी कि तुम जैसा दोस्त मिला मेरे पास बोलने को शब्द नहीं थे तो ऐसे देख रही थी।
मैं उसको टिक्ट केलिए पैसे देने लगी तो बोला मैं अपने दोस्त से टिक्ट के पैसे नहीं ले सकता तो मैंने कहा अगर बस के मालिक को पता चला तो गलत हो जाएगा कि आप मुझे बिना टिक्ट के सफर करवाते हो। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
तो वो हंसने लगा तब पता चला कि वही उस बस का मालिक है। उसने मुझसे एक …