This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
बाँहों में नंगी कर के वह जब चोदेगा मुझ पर चढ़ कर,चूत में घुस कर फाड़ेगा जब तब मुझको है मरने का डर।चूत मेरी सुई की आंख सम लण्ड उसका है जैसे अजगर,अगर मुझे मारना ही है तो फिर जो दिल में आये सो कर।
ऐसा तगड़ा मर्द जब छोटी सी नंगी आरती के ऊपर चढ़ कर अपना तगड़ा लण्ड आरती की चूत के छोटे से छिद्र में घुसेड़ ने की कोशिश करेगा तो कैसे ऐसा घुस पायेगा? और अगर जैसे तैसे घुस भी पाया तो जब रमेशजी उसको बाहर निकाल कर बारबार उसको अंदर बाहर कर के उसे चोदेंगे तो बेचारी छुटकी आरती का क्या हाल होगा?
रमेशजी का इतना लंबा लण्ड आरती की बच्चे दानी को भी ऐसी ठोकर मारेगा की उसकी चूत तो फट ही जायेगी। क्या उसकी बच्चेदानी इस आदमी के लण्ड का मार झेल पाएगी? यह सोच कर आरती को चक्कर आने लगे।
पर अब सच का सामना तो करना ही था। अब तो रमेशजी आ चुके थे। अब पीछे हटने की कोई गुंजाइश नहीं थी। जिस तरह से रमेशजी आरती को प्यार भरी नज़रों से देख रहे थे उसे देख कर आरती को कुछ ढाढस सा लगा।
आरती ने सोचा की शायद रात को चुदवाते …