This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
कोई क्या जाने दिल की हालत जो परवानों की होती है।ख़ौफ़ मरने का तो है फिरभी जितअरमानों की होती है।
परवाने यह जानते हुए भी की वह शमाकी लौ में जल जाने वाले हैं, शमा की आग में कूदने से बाज नहीं आते। आरती फैंसला कर चुकी थी। अब सवाल इस पार या उस पार का नहीं था। उसने रमेश से आरती के घर आकर आरती के पति से मिलने का आमंत्रण दे दिया था। रमेश के घर में और ख़ास कर रमेश के खुद के मन में अजीबोगरीब उत्सव और उल्लास का सा माहौल था। रमेश ने दस दिन के बाद का अपना टिकट बुक करा दिया था। मुझे आरती और अर्जुन दोनों की और से यह समाचार मिल चुका था।
तब अचानक मुझे आरती का एक मेसेज आया तो मेरे दिलकी धड़कन रुक सी गयी। आरती ने लिखा था, “अंकल, मैंने रमेश को आने के लिए आमंत्रण तो दे दिया था पर मैं अब इस चक्कर को ख़तम कर देना चाहती हूँ। मैंने अर्जुन को कह दिया है की मैं रमेशजी से सारे नाते रिश्ते तोड़ने जा रही हूँ। मैं रमेश जी …