This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
रमेश का जवाब आया, “अर्जुनजी, यह मैं भी जानता हूँ। आरती से मैं प्रीती समझ कर चैट कर रहा था। आरती आपके कहने से प्रीती के नाम से चैट तो कर रही थी पर उसने अपने नाम और सच्चा परिचय छोड़ अपने मन की सारी बातें साफ़ साफ़ मुझे बतायी हैं…
वह मुझे अंकल कह कर चैट करती है। चुदवाने की बात तो दूर, वह अपना कुछ भी दिखाने तक से साफ़ साफ़ मना कर रही है। वह तो मेरा लण्ड भी देखने के लिए कतई तैयार नहीं थी। बड़ी मुश्किल से मैंने कितनी मिन्नतें कर उसे अपना लण्ड दिखाया…
मेरी भी समझ में यह नहीं आ रहा की मैं उसे चुदवाने के लिए कैसे मनाऊंगा। पर मैं कोशिश जरूर करूंगा क्यों की मैं सच कहता हूँ की मुझे आपकी बीबी से एक तरफा प्यार हो गया है। अब आपको अच्छा लगे या बुरा पर यह सच है।”
अर्जुन ने जब यह मेसेज पढ़ा तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे रमेश की शर्तें मानने में कोई प्रॉब्लम नहीं था। वह जानता था की अगर रमेश थोडासा भी इधर उधर होगा तो उसको कण्ट्रोल करना कोई मुश्किल नहीं है। अर्जुन काफी पैसे वाला होने के उपरांत उसने कुछ गुंडे …