This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
कुछ देर बाद सिम्मी ने एक छोटा सा तौलिया लिया और अपनी चूत के अंदर डाल कर सफाई की और जाँघों को पोंछा।
सिम्मी कालिया की चुदाई करने की क्षमता से प्रभावित थी। जैसे करीब आधा घंटे तक कालिया ने सिम्मी को बगैर झड़े चोदा यह उसकी सख्त बदन और शारीरक क्षमता का परिचय देता था। साथ साथ में कालिया ने सिम्मी को थोड़ा थका दिया था। सिम्मी जिद्दी और अड़ियल थी। वह अपनी हार मानने वाली नहीं थी। उस के लिए अब यह इज्जत का सवाल था।
सिम्मी ने कहा, “मेरे आज रात के पति, मैं थकी नहीं हूँ। ज़रा इसे साफ़ करलूं।” कह कर सिम्मी फिर से कालिया का वीर्य साफ़ करने में जुट गयी।
जाँघों की सफाई होने के बाद सिम्मी कालिया को देखने पीछे मुड़ी और कालिया की और घूम कर उससे सट गयी। कालिया की बाँहों में जाकर उसने अपने होँठ कालिया को किस करने के लिए उठाये। कालिया ने फ़ौरन झुक कर सीम्मी को उठाकर पलंग के ऊपर रखा और उसे सुलाकर फिर उसके ऊपर चढ़ गया और उसके होठोँ से अपने होँठ मिलाकर उससे प्रगाढ़ चुम्बन में जुट गया।
चुम्बन के बाद कालिया सिम्मी को घोड़ी बनाकर उसके पीछे पहुँच गया। कालिया ने सिम्मी के पीछे जा कर उसे कमर से पकड़ा। पीछे से कालिया को सिम्मी की गाँड़, उसकी गोलाई, उसके बिच की दरार को बड़े प्यार से देखा।
सिम्मी की गाँड़ की दरार, जो इतनी लम्बी दिख रही थी की कब वह गाँड़ में से चूत में परिवर्तित हो जाती थी, पता ही नहीं लगता था, बहुत मोहक लग रही थी। कालिया सिम्मी की करारी और कामुक, भरी हुई गाँड़ देख कर अपने आपको रोक ना सका।
उस ने कस कर सिम्मी की गाँड़ पर तगड़ी चपेट मारी। वह चपेट इतनी तगड़ी थी की पूरा कमरा उसकी आवाज से गूँज उठा। सिम्मी को इतनी सख्त टीस उठी की वह दर्द के मारे कराह उठी। सिम्मी की गाँड़ लाल हो उठी थी। पर सिम्मी को इस दर्द में भी एक अजीब से रोमांच का एहसास हुआ।
पता नहीं क्यों सिम्मी को बड़ा आश्चर्य हुआ की उसकी …