This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
कालिया ने एक हल्का धक्का मार कर सिम्मी की गीली चिकनी चूत में अपना लण्ड थोड़ा सा घुसेड़ा। सिम्मी इस बार तैयार थी। सिम्मी ने कालिया की और देख कर कुछ मुस्कुरा कर इशारा किया की वह लण्ड को और घुसाए।
कालिया ने और जोर लगा कर एक झटके में आधा लण्ड जब सिम्मी की चूत में घुसेड़ा तब सिम्मी की कराहट निकल गयी। सिम्मी को चूत खिंच कर फूल गयी थी। कालिया ने देखा की सिम्मी आँख बंद कर कालिया के लण्ड को अपने बदन में महसूसकर रही थी।
सिम्मी ने फिर कालिया की और देखा और मुस्कुरायी। पहली दो बार सिम्मी ज्यादातर अपनी आँखें बंद कर कालिया के आक्रमण को झेल रही थी पर इस बार कालिया को सिम्मी में बड़ा फर्क नजर आया। सिम्मी कालिया से चुदवाना चाहती थी और उसमें उसे कोई शर्म, अफ़सोस या घृणित भाव नहीं था।
कालिया ने सिम्मी की मुस्कान को उसकी इजाजत मानकर एक धक्का और दिया और इस बार कालिया का पूरा लण्ड सिम्मी के बदन के अंदर चला गया। मैंने यहां चूत नहीं पर बदन शब्द का इस्तेमाल किया है क्यूंकि कालिया का लण्ड चूत की हद से आगे तक पहुँच रहा था। देखने वाले को सिम्मी के पेट में सिम्मी की नाभि के निचे कालिया के लण्ड से उठी हुई चमड़ी दिख सकती …