This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
काफी देर तक चिपके रह कर एकदूसरे के मुंह में अपनी लार दे कर और एक दूसरे की जीभ चूसकर आखिर में दोनों अलग हुए।
सिम्मी का स्त्री रस जो उसकी चूतमें से चू रहा था उसे कालिया को चाटना था जिससे की उस रात की उसकी मल्लिका खुश हो जाए और कालिया को अपना सर्वस्व ख़ुशी से अर्पण कर उस रात को यादगार बना दे।
कालिया ने बड़े प्यार से नंगी सिम्मी को अपनी बाँहों में उठा कर पलंग के एक छोर पर लिटा दिया और उसकी टाँगों को फैला कर उसकी टांगों के बिच में जा पहुंचा।
कालिया ने सिम्मी की चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को अपनी उँगलियों से जुदा किया और जीभ लम्बी कर सिम्मी की चूत के दाने को जीभ की नोक से चाटने लगे।
जैसे ही कालिया की जीभ की नोक ने सिम्मी की चूत के दाने को छुआ तो सिम्मी पलंग पर ही उछल पड़ी। …