यह उस समय की बात है जब मै अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी के लिए दिल्ली आया था। दिल्ली में मेरे भैया रहते थे उनकी शादी ५ साल पहले हुई थी लेकिन अभी कोई बच्चा नहीं था। मेरी नौकरी एक कंपनी में लग गई। मेरी ड्यूटी शिफ्टों में लगती थी। उसी समय मेरा दोस्त मनीष भी नौकरी केलिए दिल्ली आया।
मैंने भैया से पूछा की उसे जब तक नौकरी नहीं मिलती वो हमारे साथ ही रह ले तो वो मान गए। मेरा दोस्त और मै हॉस्टल में रूम पार्टनर थे। इस लिए हमलोग हर चीज़ खुल के बात कर लेते थे कुछ भी छुपाते नहीं थे। मेरे भैया का बिज़नेस था और भाभी नौकरी करती थी।
भैया बिज़नेस के कारण काफी देर से घर आते थे और भाभी ५ बजे तक आ जाती थी। मै तो शिफ्ट में ड्यूटी के कारण कभी ६ से 3 बजे तक तो कभी 3 से १२ और कभी १२ बजे से ७ बजे तक बहार रहता। घर में भाभी और मनीष कई बार अकेले रहते थे।
भाभी मेरी ५’३” हाइट की थी और जयादा पतली नहीं थी पर मोटी नहीं थी। गोरी थी। हलाकि मैंने उन्हें बिना कपड़ो के देखा नहीं था पर उनके बूब्स बड़े लगते थे। करीब १५ दिन के बाद एक दिन मनीष ने मेरे से पूछा राज तुझे कभी भाभी को चोदने का मन नहीं करता तो मैंने उसे डाटा क्या बात कर रहा है चुप कर तब उसने कहा यार मुझे तो उन्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है देखता नहीं उनके बूब्स और चूतड़ कितने मस्त लगते है।
तब मैंने कहा अबे साले तेरे साथ मुझे भी घर से निकल दिया जायेगा कुछ ऐसी वैसी हरकत मत कर देना। तब उसने कहा अगर तू कहे तो मै उन्हें पटा लू तब तुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होगा। मैंने कह दिया तो पटा ले अगर पटती है तो पर ध्यान रखना साले अगर अगर कुछ बुरा हुआ तो में तुझे छोडूंगा नहीं।
तब उसने कहा मत छोड़ना अगर पट गई तो तुझे भी दिलवा दूंगा। उस दिन हमारी बात ख़तम हो गई और हम लोग सोने लगे। अब मै मनीष की बाते सोचने लगा तो सही में मेरी भाभी मॉल लगने लगी उनके बूब्स चूतड़ सब मस्त लगने लगे मेरा लंड आज पहले बार भाभी के नाम पर खड़ा हुआ था काफी देर के बाद मुझे नीद आ गई सुबह देखा तो मेरा मॉल निकल गया था।
अब तो भाभी जब सामने आती तो चोदने का मन करता था पर मै कुछ कर नहीं सकता था। उधर मनीष अब …