अब आगे की कहानी – प्रोफेसर भी एक हाथ से जींस के ऊपर से मेरी मोटी एवं गोल गांड को दबाने लगा और दूसरे हाथ से मेरी मुलायम नंगी पीठ जोर-शोर से मसलते हुए कामुक आंहें भरने लगा। मैं बहुत गर्म हो चुकी थी और प्रोफेसर की गर्दन और छाती पर दांत गढा़ने लगी, मैं जितनी जोर से प्रोफेसर की गर्दन तथा छाती को चूसती उतनी ही जोर से उसके मुंह से कामुक आंहें निकलने लगतीं और पूरा रूम चुदाई के महौल में रंगा हुआ महसूस होने लगा।
तभी प्रोफेसर ने मुझे बालों से पकड़ लिया और बालों से खींच कर मेरा मुंह थोड़ा ऊपर की तरफ कर लिया। जैसे ही मेरा मुंह ऊपर को हुआ प्रोफेसर ने अपने होंठ मेरी गर्दन के नीचे लगा दिए और चूमने लगा। उसके होंठों का स्पर्श अपनी गर्दन पर पाते ही मेरे बदन में बिजली दौड़ने लगी और मैं उसके सिर में हाथ घुमाने लगी।
थोड़ी देर बाद वो अपनी जीभ से मेरी गर्दन चाटते हुए मुंह में खींच कर चूसने लगा और उसके हाथ मेरे बूब्ज़ से खेल रहे थे। प्रोफेसर ने मुझे मेरी पतली एवं गोरी कमर से पकड़ कर ऊपर को किया और मेरे बूब्ज़ चूमने लगा। वो मेरे बूब्ज़ के निप्पलों पर जीभ घुमाते हुए मुंह में ले कर चूसने लगा। वो बहुत जोर से मेरे बूब्ज़ को चूसने लगा और मेरे मुंह से अपने-आप कामुक …