This story is part of the Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti series
शाम को अजित मेरा इंतजार कर रहा था।
उसने मिलते ही पूछा, “प्रिया आप मुझे क्या सजा देना चाहते हो?”
तब मैंने कहा, “तुम्हें मुझे कॉफी पिलानी पड़ेगी।”
हम रास्ते में कॉफी हाउस में बैठे तब उसने कहा की वह अगले बारह दिन तक नहीं मिलेगा। वह अपने गाँव जा रहा था। वह बीबी को मिलने जा रहा था और खुश था।
मेरे दिमाग में पता नहीं क्या बात आयी की मैंने उसका हाथ पकड़ कर पूछा, “अजित तुम अपनी बीबी से मिलकर मुझे भूल तो नहीं जाओगे?”
बड़ा अजीब सा सवाल था। मेरे सवाल का अजित कुछ भी मतलब निकाल सकता था। शायद वह मेरी सबसे बड़ी गलती थी। मैंने सीधे सीधे अपनी तुलना उसकी बीबी के साथ कर दी थी।
वह मेरी और ताकता रहा। शायद उसे मेरे अकेलेपन का एहसास हो रहा था। उसने मेरा हाथ पकड़ कर दबाया और बोला, “देखो प्रिया, बीबी तो ज्यादा से ज्यादा दस दिन का साथ देगी। पर तुम तो मेरी रोज की साथीदार हो। मैं तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ? कई बार पराये अपनों से ज्यादा अपने हो जाते हैं। जो दुःख में साथ दे और दुःख दूर करने की कोशिश करे वह अपना है…
अभी तो हमारी दोस्ती की शुरुआत है। और उतनी देर में पराये होते हुए भी तुमसे मुझे शकुन मिला है। आगे चलकर यदि हम एक दूसरे से मिलकर एक दूसरे का दुःख बाँटते हैं और एक दूसरे का दुःख दूर करने की कोशिश करते हैं तो फिर तुम्हें …